शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

वीगनिज्म पर भारत में गूगल सर्च दोगुनी, मांसाहार के साथ दूध से बनी हर चीज से तौबा https://ift.tt/2HPhRcz

दुनिया में सबसे ज्यादा वेजिटेरियन आबादी वाले भारत में वीगनिज्म साल दर साल जोर पकड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में ही विराट कोहली, अक्षय कुमार, आमिर खान, अनुष्का शर्मा जैसी तमाम हस्तियां वीगन हो गईं, तो आम लोगों ने भी गूगल पर वीगनिज्म या वीगन जैसे शब्दों को दोगुना से ज्यादा सर्च किया। जीव-जन्तु से मिलने वाले हर तरह की चीज को छोडऩे का यह वेस्टर्न लाइफ स्टाइल भारत के लिए यों तो नया है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक परपंराओं के चलते एकदम अनजाना नहीं। यहां वेजिटेरियन होना कोई चौंकाने वाली बात नहीं। हां, दूध-दही और देशी घी के दीवाने इस देश में वेजिटेरियन से वीगन होना चुनौती भरा जरूर है। बावजूद इसके भारतीयों के बीच वीगनिज्म ट्रेंड करने लगा है।

वीगन लाइफस्टाइल को लेकर पश्चिमी दुनिया में कई बड़ी रिसर्च हो चुकी हैं। मशहूर मैग्जीन साइंस में प्रकाशित एक बड़ी रिसर्च में दावा किया गया कि गया है कि अगर मांस, दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स की खपत बंद हो जाए तो दुनिया में खेती की जमीन का इस्तेमाल 75% तक कम किया जा सकता है। यह जमीन अमरीका, यूरोपी यूनियन, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बराबर होगी। रिसर्च के मुताबिक दुनिया की 83% खेती की जमीन का इस्तेमाल पशुपालन के लिए होता है, जबकि इनसे इंसानी जरूरत की केवल 18 % कैलोरी मिलती हैं।

वीगनिज्म आखिर है क्या?
फिलॉसिफी: जीने का वह तरीका जो भोजन, कपड़े या किसी दूसरे मकसद से जहां तक हो सके जानवरों के इस्तेमाल, शोषण और क्रूरता को रोकता है।

प्रैक्टिकली: ऐसा शाकाहार जिसमें किसी जीव या जंतु से मिलने वाली किसी भी चीज का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मधुमक्खियों से मिलने वाला शहद भी नहीं।

मांस के साथ दूध छोड़ना पृथ्वी को बचाने का अकेला सबसे बड़ा रास्ता

76 साल पहले अंग्रेज डॉनल्ड वाटसन ने वीगन शब्द इजाद किया
ब्रिटेन में पशु अधिकारों के पैरोकार डॉनल्ड वाटसन ने सबसे पहले वीगन शब्द का इस्तेमाल किया। उन्होंने नवंबर 1944 में अपनी पत्नी डोरोथी और तीन दोस्तों के साथ दी वीगन सोसाइटी बनाई थी। उन्होंने ऐसे शाकाहारियों को वीगन कहा जो डेयरी प्रोडक्ट और अंडे नहीं खाते। मगर 1951 में वीगन सोसाइटी ने हर तरह की पशुक्रूरता को जीवन से खत्म करने को वीगनिज्म में शामिल कर लिया।

14 बरस की उम्र में न्यू इयर रेजोलुशन लेकर मांसाहार छोड़ा
1910 में यूके के यॉर्कशायर में जन्मे वॉटसन के पिता खनन करने वाले समुदाय के हेडमास्टर थे। बचपन में वे अपने चाचा के खेतों पर अक्सर जाते थे। वहीं मांस के लिए सुअर को मारने की घटना ने उन्हें काफी बेचैन कर दिया। 1924 में 14 वर्ष के वॉटसन ने नए साल का प्रण लेकर मांसाहार छोड़ दिया। इसके बाद उन्हें लगा कि दूध के लिए भी मवेशी पालना अनैतिक है। इसके बाद उन्होंने दूध भी छोड़ दिया।

पिछले 5 सालों में देश की कई हस्तियों ने वीगनिज्म को अपनाया

  • विराट कोहली: 2018 में दक्षिण अफ्रीका के टूर के दौरान रीढ़ की हड्डी में एक नस दबने से हाथ की उंगली तक तेज उठा। जांच हुई तो पता चला कि मांसाहार से शरीर में बहुत ज्यादा यूरिक एसिड बनने लगा। आंतों ने कैल्शियम सोखना बंद कर दिया। शरीर हड्डियों से कैल्शियम खींचने लगा था। इसके बाद ही विराट ने वीगनिज्म को अपना लिया। उनका दावा है कि इन दो वर्षों जैसा पहले कभी महसूस नहीं किया। इससे उनका खेल पहले से बेहतर हुआ है।
  • अनुष्का शर्मा : 2015 में वीगनिज्म को अपनाया। अक्टूबर 2019 में उन्होंने ट्वीट किया, "लोग अक्सर पूछते हैं कि मैं प्रोटीन कहां से लेती हूं। फिल्म गेम चेंजर उनको मेरा जवाब है।" फिल्म में अरनॉल्ड श्वार्जनेगर समेत तमाम एथलीट्स ने बताया कि मांसाहार से ही प्रोटीन मिलने की बात मार्केटिंग का हथकंडा है।
  • कंगना रनौत: खुलकर अपनी बात रखने वाली कंगना ने पांच साल पहले ही वीगनिज्म को अपना लिया। मांसाहार छोडऩे पर भी उन्हें एसिडिटी होती रही तो वह पूरी तरह वीगन हो गईं।
  • अक्षय कुमार: 52 साल के अक्षय कुमार देश के सबसे फिट फिल्म स्टारों में से एक हैं। उन्होंने तीन साल पहले वीगनिज्म को अपनाया था। अक्षय पार्टियों में नहीं जाते। सुबह चार बजे उठकर योग करते हैं।
  • आलिया भट्टः गर्मी ज्यादा लगने के चलते पहले मांसाहार छोड़ा फिर दूध से बने प्रोडक्ट। आलिया को अब फल और सब्जी अच्छे लगते हैं। कहती हैं कि उन्हें वीगन डाइट का मजा आ रहा है।
  • आमिर खान-किरण राव: वीगन किरण राव ने आमिर खान को 2015 में एक वीडियो दिखाया, जिसमें दिखाया गया था कि मौत की वजह बनने वाली 15 सबसे आम बीमारियों से डाइट बदलकर बचा जा सकता है। इसके बाद आमिर वीगन हो गए।
  • सोनम कपूर: पेटा ने 2018 में इंडियाज पर्सन ऑफ द ईयर बनाया। दूध के लैक्टोज को पचाने में परेशानी के चलते वीगन बनीं। बाद में उन्होंने चमड़े से बने प्रोडक्ट्स का भी इस्तेमाल बंद कर दिया।
  • माधवन: पशु अधिकारों के लिए अक्सर आवाज उठाने वाले RHTDM फेम आर माधवन ने हमेशा के लिए वीगनिज्म को अपना लिया है। उन्हें पेटा पर्सन आफ द इयर बना चुका है।

1918 में ही वीगनिज्म का आइडियाः महात्मा की दुविधा, गाय-भैंस का दूध छोड़ा तो बकरी का दूध कैसे पिएं

यह तस्वीर 5 दिसंबर 1931 को लंदन में ली गई थी। लंदन दौरे में भी महात्मा गांधी के लिए दो बकरियों का इंतजाम किया गया था।

भारत में वीगनिज्म को लेकर शायद पहला रिकॉर्डेड किस्सा महात्मा गांधी और दूध को लेकर उनकी दुविधा से जुड़ा है। तब तो दुनिया में ही वीगनिज्म का ऐसा आइडिया नहीं था। हुआ यों कि दक्षिण अफ्रीका से 1915 में भारत लौटे महात्मा गांधी बिहार के चंपारण के बाद 1918 में गुजरात के खेड़ा में बड़ा किसान आंदोलन किया। इसके तुरंत बाद वे गंभीर पेचिश के शिकार हो गए। डॉक्टरों ने सलाह दी कि उन्हें ज्यादा प्रोटीन की जरूरत है। एक तरफ गांधी शाकाहारी थे तो दूसरी तरफ उन्हें दालें पच नहीं रही थीं। प्रोटीन के लिए उन्हें डॉक्टरों ने दूध लेने की सलाह दी। बस यहीं गांधी की वीगन दुविधा सामने आकर खड़ी हो गई है। दरअसल, गांधी दूध के लिए गायों पर की जाने वाली फूंका (काउ ब्लोइंग) नाम की प्रथा के खिलाफ थे। इसमें दूध दुहने के लिए गायों के अंग में हवा भरी जाती थी। वहीं, बछड़े की मौत होने पर उनकी खाल में भूसा भरकर तैयार डमी से गाय-भैंस को जिंदा बछड़े का अहसास दिलाने और दूध दुहने से भी गांधी सहमत नहीं थे। गांधी इन दोनों परंपराओं को गाय-भैंस के साथ हिंसा मानते थे। इसके चलते ही उन्होंने दूध या उससे बनने की सभी चीजें छोड़ दी थीं।
एक तरफ महात्मा अपना प्रण नहीं तोड़ सकते थे तो दूसरी तरफ उनका जीवित रहना भी जरूरी थी। यही थी वीगन महात्मा गांधी की दुविधा। कस्तूरबा ने उन्होंने गांधी से गाय या भैंस की जगह जीने के लिए बकरी का दूध पीने की सलाह दी।
गांधी ने यह बात तो मान तो ली मगर वे जानते थे कि उन्होंने अपने आदर्शों से समझौता कर लिया था। आत्मकथा सत्य के साथ मेरे प्रयोग में उन्होंने लिखा, मेरे इस कार्य का डंक अभी मिटा नहीं है और बकरी का दूध छोडऩे के विषय में मेरा चिंतन चल ही रहा है। बकरी का दूध पीते समय मैं रोज दुख का अनुभव करता हूं।



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Google search doubling veganism in India, than meat-milk with milk-curd, butter-desi ghee; Animal husbandry accounts for 83% of the world's cultivated land, calories are only 18%,


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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

लड़की ने इनकार क्या किया, मर्द का इगो सांप जैसा फुफकारता है, फिर उसे कुचलने की कवायद शुरू होती है https://ift.tt/32fGYNh

हाल ही में हरियाणा में एक लड़की को सरेबाजार गोली मार दी गई। वजह- लड़की ने युवक का प्रेम-निवेदन अस्वीकार कर दिया था। निकिता, जो IAS बनने का ख्वाब देख रही थी, उसके ख्वाब को तौफीक ने भरी सड़क बेरहमी से कुचल दिया।

तौफीक के एकतरफा प्यार के बारे में दोनों का ही पूरा घर जानता था, लेकिन किसी ने तौफीक को भरे बाजार बेइज्जत नहीं किया, कस के तमाचा मारना तो दूर की बात है। निकिता अकेली नहीं। ऐसी हजारों-लाखों लड़कियां रोज सड़क पर इस खतरे के साथ निकलती हैं कि कहीं किसी मर्द की नजर उन पर पड़े और वो उसे पसंद न कर ले।

पसंद करते ही शुरू होता है इजहार और इनकार का खेल। लड़की ने जरा इनकार क्या किया, मर्दों का इगो कांच की तरह झन्न करके टूट जाएगा। आखिर वो खुद को समझती क्या है? ऐसे कौन से सुर्खाब के पर लगे हैं? चोटिल इगो को मर्द के यार-दोस्त और उकसाते हैं।

अरे, कहीं किसी और के साथ तो लफड़ा नहीं चल रहा! कल खूब बन-ठनकर कहीं गई थी। इगो सांप की तरह फुफकार मारता है और फिर लड़की को कुचलने की तमाम कवायद चल पड़ती है। जिस चेहरे पर इतरा रही है, उसे ही खत्म कर देते हैं।

कहीं की न रहेगी और ये लीजिए, तुरंत एसिड की बोतल आपके हाथ में आ जाती है। जिस शरीर को इतना सहेज रही है, उसे ही रौंद देते हैं। कहीं की न रहेगी और फिर होता है गैंगरेप। पसंद करने वाला मर्द दावत की तरह उसे अपने साथियों में भी परोसता है। चटखारे लेकर लड़की को भोगते हुए वो भूल जाता है कि कल ही तो वो इसी लड़की को दिलोजान से चाहने के दावे कर रहा था।

ये क्या है मर्दों? दफ्तर में अपने पुरुष बॉस से एक छुट्टी के लिए लताड़ सुनने पर तो आपका इगो नहीं भचकता। बाप की डांट पर उसे मारने की साजिश तो नहीं रचते। दोस्तों के मजाक पर उन्हें डसने को नहीं दौड़ते। यहां तक कि सड़क पर गलत साइड चलने पर गाली किसी अनजान पुरुष मुख से उचारी जाए तो भी आपकी जान नहीं निकलती। फिर ये लड़कियों के साथ क्या मसला है बॉस?

मर्द, तुम मन के कैसे-कैसे मैल दिखला रहे हो? राजनीति न हुई, मानो मर्द जाति की व्‍यक्तिगत बिसात हो गई

क्या लड़कियां सड़क पर निकलते ही किसी मर्द की जागीर बन जाती हैं? या फिर ये आपके नाजुक कानों का नुक्स है, जो केवल हां ही सुन पाता है। विज्ञान की छात्रा होने के नाते इतना खूब समझती हूं कि मर्द या औरत किसी के कान में ऐसा कोई फिल्टर नहीं, जो न को बाहर ही छानकर रख दे। फिर लड़की की न में आखिर ऐसा क्या है जो आप इतना तनफना जाते हैं।

दफ्तर में एक लड़की को अक्सर एक चेहरा एकटक लगाए देखता दिखता था। लड़की को लगा भौंहों और माथे पर सिकुड़नें उसकी 'न' को समझाने के लिए काफी होंगी, लेकिन उतना काफी नहीं होता, ये लड़कियां क्यों नहीं समझतीं। आंखें ही क्यों नहीं नोच लेती पहली दफा में।

वैसे इनकार न सुन पाना अकेले हिंदुस्तानी मर्दों की बपौती नहीं। साल 2014 में कैलिफोर्निया के सांता बारबरा में इलियट रोजर नाम के युवक ने 6 औरतों को गोलियों से भून दिया और 14 को घायल कर दिया। पकड़े जाने के बाद युवक ने माना कि जितना मुमकिन हो, वो उतनी औरतों को मारना चाहता है। औरतों की भूल भी कोई छोटी-मोटी नहीं, काफी गंभीर है, कई औरतों ने इलियट को रिजेक्ट कर दिया था।

रिजेक्शन झेल रहे बेचारे मर्दों की एक ऑनलाइन बिरादरी भी बन चुकी है, जिसमें वे औरतों से बदला लेने के तरीके डिस्कस करते हैं। इंसेल नाम की इस बिरादरी के मायने हैं- अनचाहे ही कुंवारा रह जाना। इससे जुड़े पुरुषों की जिंदगी में कोई लड़की प्रेमिका या सेक्स पार्टनर बनकर नहीं आई। लिहाजा, गुस्साए मर्दों ने उनके खिलाफ अभियान चला डाला।

मर्द कहते हैं कि औरतें बेहद छिछली होती हैं और अच्छी कद-काठी या पैसों पर मरती हैं। उन्हें चमकते दिल से कोई सरोकार नहीं। क्या सचमुच! आप मर्द इतना ही चमकीला दिल रखते हैं? और यकीन जानो लड़कियों, थोड़ी गलती तो तुम्हारी भी है। सड़क पर जैसे ही लड़के ने तुम्हें अपनी जागीर क्लेम किया, सहमकर उसे टालने की बजाए पलटकर एक तमाचा जमा देती तो हाल-ए-किस्मत ऐसी न होती।

याद है वो दिन, जब तुम्हारे ट्यूशन से बाहर निकलते ही लड़कों का एक ग्रुप ठहाका मारते हुए हंसने लगा था। तेज-तेज पैडल मारते हुए घर भागने की बजाए रुक जाती। आंखों में आंखें डालकर उन लड़कों को दो तमाचे रसीद कर देतीं, तो कॉलेज या दफ्तर जाते हुए चाकुओं से न गोदी जातीं।

बेचारी लड़की करे क्या। किसी शहर में किसी मर्द ने कसकर चूम लिया। लड़की रो पड़ी तो लड़के ने हैरत से पूछा- अरे, तुम ही तो हंसकर बात करती थीं। हंसकर बात तो मैं कबाड़ लेने वाले, भाजीवाले, पार्लर में बाल काटने वाले और वॉक पर रोज दिखने वालों से भी करती हूं, तो क्या सबको चूमने का लाइसेंस मिल गया?

बेचारे मर्द भी क्या करें। जिम्मेदारी सिर पड़ी तो निभाएंगे ही। लिहाजा, सड़क पर चलती जिस लड़की पर आंखें दो घड़ी टिक जाएं, उसे ही प्रपोज करने को तुल जाते हैं। साथ में कृतार्थ करने का भाव। मैंने पसंद किया तो हां तो बोलेगी ही। इस डर में कि चेहरा और होंठ और छातियां एसिड से नहीं झुलसेंगी, अगर केवल मुंडी हिलाते हुए हां कह देतीं हैं।

क्या ये तस्वीर कुछ और नहीं होती अगर हम अपने बेटों को मांसपेशियों की ताकत के साथ न सुनने की शक्ति भी देते। मर्दाना बनाते हुए उन्हें थोड़ा-सा जनाना भी बना पाते। उन्हें घुट्टी में ये पिलाकर कि 'न' शब्द तुम्हारे लिए भी बना है बरखुरदार।

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What does the girl deny, Iago of men hears like a snake and then there is a lot of exercise to crush him.


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मुंबई में गार्ड को देख तय किया, गांव लौट खेती करूंगा; अब सालाना टर्नओवर 25 लाख रुपए https://ift.tt/3e9FyZk

औरंगाबाद के बरौली गांव के रहने वाले अभिषेक कुमार मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर थे। अच्छी-खासी सैलरी थी। सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक उन्होंने शहर से गांव लौटकर खेती करने का प्लान बनाया। 2011 में गांव लौट आए। आज वो 20 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। धान, गेहूं, लेमन ग्रास और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। दो लाख से ज्यादा किसान देशभर में उनसे जुड़े हैं। सालाना 25 लाख रुपए का टर्नओवर है।

33 साल के अभिषेक की पढ़ाई नेतरहाट स्कूल से हुई। उसके बाद उन्होंने पुणे से एमबीए किया। 2007 में HDFC बैंक में नौकरी लग गई। यहां उन्होंने 2 साल काम किया। इसके बाद वे मुंबई चले गए। वहां उन्होंने एक टूरिज्म कंपनी में 11 लाख के पैकेज पर बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर ज्वाइन किया। करीब एक साल तक यहां भी काम किया।

2016 में पीएम मोदी ने अभिषेक को कृषि रत्न सम्मान से नवाजा था।

अभिषेक कहते हैं, 'मुंबई में काम करने के दौरान मैं वहां की कंपनियों में तैनात सिक्योरिटी गार्ड से मिलता था। वे अच्छे घर से थे, उनके पास जमीन भी थी, लेकिन रोजगार के लिए गांव से सैकड़ों किमी दूर वे यहां जैसे-तैसे गुजारा कर रहे थे। उनकी हालत देखकर अक्सर मैं सोचता था कि कुछ करूं ताकि ऐसे लोगों को गांव से पलायन नहीं करना पड़े।

वो कहते हैं, '2011 में मैं गांव आ गया। पहले तो परिवार की तरफ से मेरे फैसले का विरोध हुआ। घरवालों का कहना था कि अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर गांव लौटना ठीक नहीं है। गांव के लोगों ने मजाक उड़ाया कि पढ़-लिखकर खेती करने आया है, लेकिन मैं तय कर चुका था। मैंने पिता जी से कहा कि एक मौका तो दीजिए, फिर उसके बाद जो होगा वो मेरी जिम्मेदारी होगी।'

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अभिषेक का फैमिली बैकग्राउंड खेती रहा है। उनके दादा और पिता खेती करते थे। खेती की बेसिक चीजें उन्हें पहले से पता थीं। कुछ जानकारी उन्होंने फार्मिंग से जुड़े लोगों से और कुछ गूगल की मदद से जुटाई। उन्होंने एक एकड़ जमीन से खेती की शुरुआत की।

पहली बार एक लाख की लागत से जरबेरा फूल लगाया। इससे पहले ही साल चार लाख की कमाई हुई। इसके बाद उन्होंने लेमन ग्रास, रजनीगंधा, मशरूम, सब्जियां, गेहूं जैसी दर्जनों फसलों की खेती शुरू की।

अभिषेक ने 2011 में खेती शुरू की। उनके साथ देश के 2 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं।

आज अभिषेक 20 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं। 500 से ज्यादा लोगों को उन्होंने रोजगार दिया है। 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। बिहार सरकार की तरफ से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने तेतर नाम से एक ग्रीन टी की किस्म तैयार की है। जिसका पेटेंट उनके नाम पर है। इस चाय की काफी डिमांड है। पूरे भारत में इसके ग्राहक हैं।

अभिषेक के लिए यह सफर आसान नहीं रहा है, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। 2011 में ही वो सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। इसके बाद बैसाखी के सहारे कई महीनों तक उन्हें चलना पड़ा था। वो कहते हैं- खेती को लाभ का जरिया बनाया जा सकता है। इसके लिए बेहतर प्लानिंग और अप्रोच की जरूरत है।

जो टमाटर सीजन में 2 रुपए किलो बिक रहा है, उसे ऑफ सीजन में बेचा जाए तो 50 रुपए से ज्यादा के भाव से बिकेगा। इतना ही नहीं अगर उसे प्रोसेसिंग करके स्टोर कर लिया जाए तो अच्छी कीमत पर ऑफ सीजन में बेचा जा सकता है।

वो बताते हैं कि रजनीगंधा की खेती काफी फायदेमंद है। रजनीगंधा की पूरे देशभर में काफी डिमांड है। एक हेक्टेयर में रजनीगंधा फूल की खेती करने में लागत करीब डेढ़ लाख रुपए आएगी। इससे एक साल में पांच लाख तक की आमदनी हो सकती है।

अभिषेक कहते हैं कि खेती को लाभ का जरिया बनाया जा सकता है। इसके लिए बेहतर प्लानिंग और अप्रोच की जरूरत है।

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अच्छी खेती के लिए जरूरी स्टेप्स
1. क्लाइमेट कंडीशन :
हम जहां भी खेती शुरू करने जा रहे हैं, वहां के मौसम के बारे में अध्ययन करना चाहिए। उस जमीन पर कौन-कौन सी फसलें हो सकती हैं, इसके बारे में जानकारी जुटानी चाहिए।
2. स्टोरेज : प्रोडक्ट तैयार होने के बाद हमें उसे स्टोर करने की व्यवस्था करनी होगी ताकि ऑफ सीजन के लिए हम उसे सुरक्षित रख सकें।
3. मार्केटिंग और पैकेजिंग : यह सबसे अहम स्टेप हैं। प्रोडक्ट तैयार करने के बाद हम उसे कहां, बेचेंगे, उसकी जगह के बारे में जानकारी जरूरी है। इसके लिए सबसे बेहतर तरीका है, वहां की लोकल मंडियों में जाना, लोगों से बात करना और डिमांड के हिसाब से समय पर प्रोडक्ट पहुंचना। इसके अलावा सोशल मीडिया भी मार्केटिंग में अहम रोल प्ले करता है।

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औरंगाबाद के बरौली गांव के रहने वाले अभिषेक कुमार को खेती के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं।


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अब आप-हम भी खरीद सकते हैं कश्मीर में जमीन; आइए समझते हैं कैसे? https://ift.tt/3jJIcGb

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के कानूनों में बड़े बदलाव किए। पिछले साल 5 अगस्त को बने इस नए केंद्र शासित प्रदेश के लिए पांचवां ऑर्डर जारी किया। इसने राज्य के 12 पुराने कानून खत्म कर दिए। साथ ही 14 कानूनों में बदलाव किया।

पूरे देश में इस फैसले को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की सफलता माना जा रहा है, वहीं कुछ लोग जम्मू-कश्मीर के ऐतिहासिक जमीन सुधार कानून को रद्द करने की आलोचना भी कर रहे हैं। दरअसल, पूरे भारत के लिए यह फैसला जितना साफ-सुथरा दिख रहा है, वह वैसा है नहीं। इससे जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को भी जमीन की खरीद-फरोख्त करने का अधिकार मिल गया है।

गृह मंत्रालय का आदेश क्या है?

  • केंद्र सरकार ने पिछले साल संविधान के आर्टिकल 370 और 35A को रद्द किया और जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाया था। आर्टिकल 35A यह गारंटी देता था कि राज्य की जमीन पर सिर्फ उसके स्थायी निवासियों का हक है। अब आर्टिकल 35A तो रहा नहीं, लिहाजा नए आदेश से जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने का रास्ता सबके लिए खुल गया।
  • जम्मू-कश्मीर के चार कानून ऐसे थे, जो स्थायी निवासियों यानी परमानेंट रेसिडेंट्स के हाथ में राज्य की जमीन सुरक्षित रखते थे। ये थे जम्मू-कश्मीर एलिनेशन ऑफ लैंड एक्ट 1938, बिग लैंडेड एस्टेट्स अबॉलिशन एक्ट 1950, जम्मू-कश्मीर लैंड ग्रांट्स एक्ट 1960 और जम्मू एंड कश्मीर एग्रेरियन रिफॉर्म्स एक्ट 1976। इनमें से पहले दो कानून रद्द हो गए हैं। बचे दोनों कानूनों में जमीन को लीज पर देने और ट्रांसफर करने से जुड़ी शर्तों में परमानेंट रेसिडेंट वाला क्लॉज हटा दिया है।

क्या कोई भी भारतीय जम्मू-कश्मीर में किसी भी जमीन को खरीद सकेगा?

  • नहीं। ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ जगह पाबंदियां अब भी लागू रहेंगी। जैसा कि जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि खेती की जमीन बाहरी लोग नहीं खरीद सकेंगे। कानून में बदलाव का उद्देश्य निवेश बढ़ाना है। खेती की जमीन सिर्फ किसानों के पास ही रहेगी।
  • बाहरी व्यक्ति जम्मू-कश्मीर में खेती को छोड़कर कोई भी जमीन खरीद सकेंगे। इसी तरह डेवलपमेंट अथॉरिटी अब केंद्रीय कानून के तहत जमीन का अधिग्रहण करेगी और तब लीज पर देने या अलॉट करने के लिए परमानेंट रेसिडेंट का नियम आवश्यक नहीं रहेगा।
  • इसी तरह डेवलपमेंट एक्ट के तहत जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से उद्योग लगाने और उनके लिए कमर्शियल सेंटर बनाने पर काम करेगा। औद्योगिक संपत्तियों को मैनेज करेगा और सरकार के नोटिफाइड इंडस्ट्रियल एरिया को डेवलप करेगा।

सेनाओं के लिए क्या कोई विशेष प्रावधान रखा है?

  • हां। हम सभी जानते हैं कि कश्मीर में सेना का डिप्लॉयमेंट और उसके लिए जमीन कितनी जरूरी है। इसके लिए डेवलपमेंट एक्ट में महत्वपूर्ण बदलाव किया है और यह आर्म्ड फोर्सेस को एनक्लेव बनाने की छूट देता है। यह सरकार को डेवलपमेंट अथॉरिटी की नियंत्रित जमीन पर स्ट्रैटेजिक एरिया तय करने का अधिकार देता है। इस क्षेत्र को सेना की डायरेक्टर ऑपरेशनल और ट्रेनिंग जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। कॉर्प कमांडर रैंक के अफसर भी इस बदलाव के लिए लिखित अनुरोध कर सकेंगे।

क्या कमजोर तबके के घरों को कोई भी खरीद सकेगा?

  • अब तक डेवलपमेंट एक्ट में लो-कॉस्ट हाउसिंग का नियम सिर्फ जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों में से आर्थिक रूप से कमजोर तबकों और कम आय वाले समूहों के लिए था। नया बदलाव देशभर के किसी भी इलाके के आर्थिक कमजोर तबके और कम आय वाले समूह को जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने या घर बनाने की इजाजत देता है।
  • यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने नई हाउसिंग पॉलिसी घोषित की है और पांच साल में वह एक लाख यूनिट्स बनाने वाली है। अफोर्डेबल हाउसिंग और स्लम एरिया डेवलपमेंट स्कीम के तहत पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप को बढ़ावा दिया जा रहा है।

तो क्या बाहरी लोगों को खेती की जमीन मिलेगी ही नहीं?

  • वैसे तो नए कानून में खेती की जमीन उसे नहीं बेच सकते जो किसान नहीं है। लेकिन, इसमें प्रावधान है कि सरकार या उसकी ओर से नियुक्त एक अधिकारी खेती की जमीन ऐसे व्यक्ति को बेचने, उपहार देने, एक्सचेंज या गिरवी रखने की मंजूरी दे सकता है। यहां जो व्यक्ति खरीद रहा है, उसके पास जम्मू-कश्मीर का स्थायी या मूल निवासी प्रमाण पत्र होना आवश्यक नहीं है। पहले तो लैंड यूज बदलने का अधिकार राजस्व मंत्री के पास था, अब कलेक्टर भी यह कर सकेगा।

केंद्र के आदेश को इतिहास पर हमला क्यों बोला जा रहा है?

  • गृह मंत्रालय के आदेश ने 70 साल पुराने जमीन सुधार कानून को खत्म कर दिया है। नया कश्मीर मेनिफेस्टो के तहत जागीरदारी प्रथा खत्म की गई थी। 1950 के बिग लैंडेड एस्टेट्स अबॉलिशन एक्ट में लैंड सीलिंग 22.75 एकड़ तय की गई थी। जिसके पास ज्यादा जमीन थी, उसकी जमीन भूमिहीनों में बांट दी गई थी। इसी तरह जम्मू-कश्मीर एग्रेरियन रिफॉर्म्स एक्ट में यह लैंड सीलिंग घटाकर 12.5 एकड़ कर दी गई थी। इस कानून को रद्द करने की वजह से ही जम्मू-कश्मीर के साथ ही देश के कई एक्सपर्ट कह रहे हैं कि यह कश्मीर के इतिहास पर बड़ा हमला है।

क्या यह बदलाव लद्दाख में भी लागू होंगे?

  • फिलहाल केंद्र सरकार के फैसले सिर्फ जम्मू-कश्मीर पर लागू होंगे, लद्दाख पर नहीं। लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था, लेकिन अब वह भी एक स्वतंत्र केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है। लद्दाख में भी आर्टिकल 35A लागू था और वहां भी जमीन पर परमानेंट रेसिडेंट्स का ही अधिकार है। केंद्र सरकार ने कहा है कि वह लद्दाख को लेकर इस मसले पर डिस्कशन को तैयार है।


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इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद के भयावह 12 घंटे; सरदार पटेल का जन्मदिन भी https://ift.tt/3oKCmZ5

इतिहास में आज के दिन से अच्छी और बुरी दोनों तरह की यादें जुड़ी हैं। एक तो भारत को आकार देने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्मदिन है। वहीं, आयरन लेडी यानी इंदिरा गांधी की हत्या का दिन भी यही है।

बात 36 साल पुरानी है। 1984 में 30 अक्टूबर को ओडिशा में चुनाव प्रचार से उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दिल्ली लौटी थीं। उन पर एक डॉक्युमेंट्री बनाने पीटर उस्तीनोव आए हुए थे। 31 अक्टूबर को मुलाकात का वक्त तय था। सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर इंटरव्यू की तैयारी पूरी हो चुकी थी। इंदिरा बाहर निकलीं। सब-इंस्पेक्टर बेअंत सिंह और संतरी बूथ पर कॉन्स्टेबल सतवंत सिंह स्टेनगन लेकर खड़ा था।

इंदिरा ने आगे बढ़कर बेअंत और सतवंत को नमस्ते कहा। इतने में बेअंत ने .38 बोर की सरकारी रिवॉल्वर निकाली और इंदिरा गांधी पर तीन गोलियां दाग दीं। सतवंत ने भी स्टेनगन से गोलियां दागनी शुरू कर दीं। एक मिनट से कम वक्त में स्टेनगन की 30 गोलियों की मैगजीन खाली कर दी। साथ वाले लोग तो कुछ समझ नहीं सके। उस समय पीएम आवास पर खड़ी एंबुलेंस का ड्राइवर चाय पीने गया हुआ था। कार से इंदिरा गांधी को एम्स ले गए। शरीर से लगातार खून बह रहा था।

एम्स के डॉक्टर सक्रिय हुए। खून बहने से रोकने की कोशिश की। बाहर से सपोर्ट दिया गया। 88 बोतल ओ-निगेटिव खून चढ़ाया, लेकिन कुछ काम नहीं आया। राजीव गांधी भी तब तक दिल्ली पहुंच गए थे। दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर औपचारिक रूप से इंदिरा गांधी की मौत की घोषणा हुई। उनके शरीर पर गोलियों के 30 निशान थे और 31 गोलियां इंदिरा के शरीर से निकाली गईं।

एम्स में सैकड़ों लोग जुटे थे। धीरे-धीरे यह खबर भी फैल गई कि इंदिरा गांधी को दो सिखों ने गोली मारी है। इससे माहौल बदलने लगा। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की कार पर पथराव हुआ। शाम को अस्पताल से लौटते लोगों ने कुछ इलाकों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। धीरे-धीरे दिल्ली सिख दंगों की आग में झुलस गई थी। रात होते-होते तो देश के कई शहरों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए।

हत्या का कारणः पंजाब में सिख आतंकवाद को दबाने के लिए इंदिरा ने 5 जून 1984 को ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया। इसमें प्रमुख आतंकी भिंडरावाला सहित कई की मौत हो गई। ऑपरेशन में स्वर्ण मंदिर के कुछ हिस्सों को क्षति पहुंची। इससे सिख समुदाय में एक तबका इंदिरा से नाराज हो गया था। इंदिरा के दो हत्यारों को 6 जनवरी 1989 को फांसी पर चढ़ाया गया था।

गुजरात में देश के सरदार का जन्म

महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के साथ सरदार पटेल।

वल्लभ भाई पटेल को भारत का लौह पुरुष भी कहते हैं और सरदार भी। 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेड़ा जिले में उनका जन्म हुआ था और उन्होंने अंतिम सांस 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में ली। सरदार पटेल का जन्म किसान परिवार में हुआ, लेकिन उन्हें कूटनीतिक क्षमताओं के लिए जाना जाता है। आजाद भारत को एकजुट करने का श्रेय पटेल की सियासी और कूटनीतिक क्षमता को ही दिया जाता है।

आज 10वीं की परीक्षा आम तौर पर 16 साल में पास हो जाती है, लेकिन सरदार पटेल ने 22 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा पास की। परिवार में आर्थिक तंगी थी और इस वजह से वो कॉलेज जाने के बजाय जिलाधिकारी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। सबसे ज्यादा अंक भी हासिल किए। 36 साल की उम्र में वल्लभ भाई वकालत पढ़ने इंग्लैंड गए। कॉलेज का अनुभव नहीं था, फिर 36 महीने का कोर्स सिर्फ 30 महीने में पूरा किया।

देश आजाद हुआ, तब पटेल प्रधानमंत्री पद के तगड़े दावेदार थे, लेकिन उन्होंने नेहरू के लिए यह पद छोड़ दिया। खुद उप-प्रधानमंत्री बने और ऐसा काम किया कि सदियों तक याद रखे जाएंगे। उन्होंने पाकिस्तान में जाने का मन बना रही जूनागढ़ और हैदराबाद रियासतों को कूटनीति से भारत में ही रोक लिया। जम्मू-कश्मीर आज भारत में है, तो उसका श्रेय भी कुछ हद तक पटेल को जाता है।

गुजरात के सरदार सरोवर डैम के पास दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति- स्टेच्यू ऑफ यूनिटी है, जो सरदार पटेल की याद में बनाई गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर 2018 को स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को लॉन्च किया था।

भारत और विश्व इतिहास में 31 अक्टूबर की प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं-

  • 1759ः फिलीस्तीन के साफेद में भूकंप से 100 लोग मारे गए।
  • 1864ः नेवादा अमेरिका का 36वां प्रांत बना।
  • 1905ः अमेरिका के सेंट पीटर्सबर्ग में क्रांतिकारी प्रदर्शन।
  • 1914ः ब्रिटेन तथा फ्रांस ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
  • 1920ः मध्य यूरोपीय देश रोमानिया ने पूर्वी यूरोप के बेसाराबिया पर कब्जा किया।
  • 1943ः भारतीय वैज्ञानिक और इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायर का जन्म हुआ।
  • 1953ः बेल्जियम में टेलीविजन का प्रसारण शुरू हुआ।
  • 1956ः स्वेज नहर को फिर से खोलने के लिए ब्रिटेन तथा फ्रांस ने मिस्र पर बमबारी शुरू की।
  • 1966ः भारत के मशहूर तैराक मिहिर सेन ने पनामा नहर को तैरकर पार किया।
  • 1975ः बांग्ला और हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार तथा गायक सचिन देव बर्मन का निधन।
  • 1978ः यमन ने अपना संविधान अपनाया।
  • 1999ः इजिप्टएयर फ्लाइट 990 अमेरिका के पूर्वी तट पर क्रैश हुई और 217 की मौत हुई।
  • 2005ः भारत की प्रसिद्ध पंजाबी एवं हिन्दी लेखिका अमृता प्रीतम का निधन हुआ।
  • 2011: दुनिया की आबादी औपचारिक रूप से 7 अरब हुई। यूएन पापुलेशन फंड ने इस दिन को डे ऑफ सेवन बिलियन कहा।
  • 2015ः रूसी एयरलाइन कोगलीमाविया का विमान-9268 उत्तरी सिनाई में दुर्घटनाग्रस्त होने से विमान में सवार सभी 224 लोगों की मौत।


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Today History for October 31st/ What Happened Today | Indira Gandhi Shot Dead By Her Bodyguards In 1984 All You Need To Know | Sardar Vallabh Bhai Patel Birthday


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बच्चों पर रिजल्ट का बोझ न डालें, दूर की सोचने को कहें; जानिए मोटिवेशन के क्या फायदे हैं https://ift.tt/3eobGIV

​​​​लीसा डैमऑर. कोरोना के चलते इस साल बच्चों की पढ़ाई आधी-अधूरी ही हुई है। बच्चे करीब 8 महीने से घर पर ही हैं। बच्चों का एकेडमिक मोटिवेशन लेवल बहुत कम हो गया है। अब जरूरत उन्हें नए तरीके से मोटिवेट करने की है, लेकिन क्या आप उन्हें ज्यादा पढ़ाई और ज्यादा नंबर लाने के लिए मोटिवेट करने वाले हैं? यदि हां तो ऐसा बिल्कुल मत करिएगा, क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना की वजह से जीने का तौर-तरीका बदला है। आप भी खुद को बदलें। परंपरागत तौर-तरीकों से बाहर आएं। बच्चों की सोच को समझने की कोशिश करें।

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, मोटिवेशन दो तरीके के होते हैं। पहला आंतरिक (Internal) और दूसरा बाहरी (External)। जानते हैं कि दोनों क्या हैं-

  1. इंटरनल मोटिवेशन से किसी काम को करने में हमें ज्यादा मजा आता है। काम के बाद संतुष्टि मिलती है। इसके अलावा सीखने की हमारी ललक और ज्यादा बढ़ जाती है।
  2. एक्सटर्नल मोटिवेशन से किसी काम में हमारा आउटकम यानी परिणाम बेहतर होता है। जैसे- जब हम किसी परीक्षा से पहले कड़ी मेहनत करते हैं और नंबर अच्छा आ जाते हैं तो उसके पीछे हमारी एक्सटर्नल मोटिवेशन होती है।

यह भी पढ़ें- महामारी के बाद हम खुद को नहीं बदल रहे, इसलिए तनाव में; 4 तरीकों से खुद को मोटिवेट करें...

बच्चों पर रिजल्ट का बोझ कैसे कम करें?

  • पढ़ाई में हमारी मोटिवेशन ज्यादातर मौकों पर इंटरनल होनी चाहिए, न कि एक्सटर्नल। इंटरनल मोटिवेशन हमें बड़े और मजबूत लक्ष्य तक ले जाती है। इससे हमारा रहन-सहन भी बेहतर होता है। हालांकि, हमेशा हम सिर्फ इंटरनल रूप से मोटिवेट नहीं हो सकते हैं।
  • रोजमर्रा की जिंदगी में हम ज्यादातर मौकों पर रिजल्ट ओरिएंटेड हो जाते हैं, यानी हम नतीजे तलाशने लगते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि युवाओं में सबसे ज्यादा इंटरनल मोटिवेशन की कमी देखी जाती है। पैरेंट्स बच्चों को तो सिर्फ रिजल्ट के बारे में ही बताते हैं। इसलिए बच्चे रिजल्ट से ही खुद की काबिलियत को आंकते हैं और रिजल्ट के बारे में सोचते हैं।
  • कोरोना की वजह से स्कूल न जाने से भी बच्चों में एंग्जाइटी और तनाव देखा जा सकता है। इसलिए बाहरी चीजों से प्रेरित बच्चों को इंटरनल तौर पर मोटिवेट करने की कोशिश करें। उनके बेहतर भविष्य के लिए उन्हें रिजल्ट के बोझ से मुक्त करें।

पैरेंट्स बच्चों को कैसे मोटिवेट करें?

  • इंटरनल मोटिवेशन कई मौकों पर बहुत मददगार होती है। हर पैरेंट्स को अपने बच्चों को आंतरिक तौर पर प्रेरित करना चाहिए। जिंदगी में कई मौके ऐसे आते हैं, जब हम असफल होते हैं, उस वक्त हम इंटरनल मोटिवेशन से अगले मौके के लिए तैयार हो सकते हैं।
  • जब हम जरूरत से ज्यादा रिजल्ट ओरिएंटेड होते हैं और असफलता मिल जाती है तो तनाव में आ जाते हैं। कोरोना के दौर में स्कूल से दूर हो चुके बच्चों को आप इंटरनल मोटिवेशन के बारे में बताएं।


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There are two motivations| wrong motivation can cause depression to the child| know how to motive|


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बिहार चुनाव में तेजस्वी यादव ने वोट के बदले बांटे नोट, जानें वायरल वीडियो का सच https://ift.tt/3kIOEid

क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बिहार चुनाव में RJD से मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव लोगों को नोट बांटते दिख रहे हैं। वीडियो बिहार चुनाव प्रचार का ही बताया जा रहा है।

और सच क्या है ?

  • वायरल वीडियो में तेजस्वी मास्क लगाए दिख रहे हैं। साफ है कि वीडियो कोरोना काल का ही है यानी ज्यादा पुराना नहीं है।
  • अलग-अलग की-वर्ड सर्च करने से इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली। जिससे पुष्टि होती हो कि तेजस्वी यादव बिहार चुनाव प्रचार में वोटरों को नोट बांटते देखे गए हैं।
  • पड़ताल के दौरान हमें तेजस्वी यादव के 31 जुलाई के ट्वीट में वायरल वीडियो से मिलता-जुलता एक वीडियो मिला। इस वीडियो में भी तेजस्वी लोगों को नोट बांटते दिख रहे हैं। यहां से हमें क्लू मिला कि वायरल वीडियो इसी साल बिहार में आई बाढ़ का हो सकता है।
  • दैनिक भास्कर वेबसाइट पर 22 जुलाई, 2020 की एक खबर है। जिससे पता चलता है कि तेजस्वी यादव ने बाढ़ पीड़ितों के भोजन की व्यवस्था की थी।
  • हमें नवभारत टाइम्स वेबसाइट पर 31 जुलाई, 2020 की रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में वही वीडियो है जिसमें तेजस्वी लोगों को पैसे बांटते दिख रहे हैं।

  • साफ है कि वायरल वीडियो का बिहार चुनाव से कोई संबंध नहीं है। 3 महीने पुराने वीडियो में तेजस्वी बाढ़ पीड़ितों को पैसे बांट रहे हैं। न की वोट के बदले नोट।


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Fact Check: In the midst of Bihar elections, Tejashwi Yadav distributed money? Know the reality of viral video


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https://ift.tt/G3WklqT opposition leaders give Republic Day parade a miss

Top opposition figures, including Congress's Sonia Gandhi and Rahul Gandhi, Delhi CM Arvind Kejriwal, NCP patriarch Sharad Pawar and Le...