सोमवार, 30 नवंबर 2020

इंसान ने 50 करोड़ जान लेने वाले चेचक को मारा, कई वायरस के टीके बनाए, एचआईवी-कोरोना भी मरेंगे https://ift.tt/36lalQt

सभ्यताओं के विकास के साथ-साथ इंसान लगातार जानलेवा वायरसों का हमला झेलता रहा है। इनसे करोड़ों लोगों की जान भी चली गई। हर बार लगा कि इंसानों पर इससे बड़ा खतरा कभी नहीं मंडराया, मगर तर्कशक्ति के बूते विज्ञान से लैस इंसानों ने बड़े से बड़े वायरस को काबू कर लिया। आधुनिक समय का ऐसा ही एक वायरस है एचआईवी। जो जानलेवा एड्स की वजह बनता है। कई दशकों की दहशत के बाद आखिर 2015 में संयुक्त राष्ट्र की अगुवाई में सभी देशों ने 2030 तक इसे दुनिया से मिटाने का ऐलान कर दिया है और हम धीरे-धीरे इस ओर बढ़ भी रहे हैं।

मौजूदा समय में पूरी दुनिया कोरोना वायरस के ऐसे ही हमले का सामना कर रही है। भारत समेत बड़े-बड़े देश इससे हिल गए, मगर इस बार भी इंसानों के जज्बे ने कोरोना पर लगाम कसना शुरू दिया है। दुनिया में कोरोना की करीब 48 वैक्सीन विकसित की जा रही हैं। इनमें से करीब 9 वैक्सीन का ट्रायल तीसरे चरण में हैं। माना जा रहा है कि 2021 में कोरोना पर भी इंसान निर्णायक जीत हासिल कर लेगा।

दरअसल, वायरस धरती पर मौजूद सबसे पुराने जीवों में से एक हैं। साइंटिफिक अमेरिकन मैगजीन के अनुसार करीब 6 लाख ऐसे वायरस हैं जो जानवरों से इंसानों में प्रवेश कर सकते हैं। एचआईवी, कोरोना के अलावा स्मॉलपॉक्स या चेचक, सार्स, इबोला, स्वाइन फ्लू, रैबीज भी ऐसे ही जानलेवा वायरस हैं। चेचक ने तो 18वीं और 19वीं सदी में 50 करोड़ से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी, मगर हमने वैक्सीन बनाकर दुनिया से इसे खत्म कर दिया। वर्ल्ड एड्स डे पर हम आपको बता रहे हैं इंसानों पर हमला करने वाले 10 सबसे खतरनाक वायरस और उसपर इंसानी जीत की कहानी।


एचआईवी : संक्रमण फैलने की रफ्तार थमी, 2030 तक जड़ से करेंगे खत्म

आधुनिक दुनिया का खतरनाक वायरस है। पिछले एक दशक में एचआईवी फैलने की रफ्तार थमी है, मगर भारत में अभी चुनौती बाकी है। भारत में करीब 22 लाख एड्स पीड़ित हैं। यूएन एड्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2018 में 88 हजार नए मरीज मिले वहीं एड्स से 69 हजार लोगों की मौत हुई। दुनिया के कुल एड्स मरीजों के 10% भारत में है। इंडेक्समंडी पोर्टल के हिसाब से दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया के बाद भारत में एड्स के सबसे ज्यादा मरीज हैं। ऐसी समस्याओं के बावजूद संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2015 में तय 12 सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) में से तीसरे लक्ष्य (बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण) के तहत 2030 तक एचआईवी को खत्म करना है। प्रोजेक्ट के तहत 2030 तक नए एचआईवी एड्स से होने वाली मौतों को 90-90% तक कम करना है। इसे प्रोजेक्ट-90 भी कहा जाता है।

इसके तहत टारगेट है कि

  1. एचआईवी संक्रमितों में 90% को खुद के संक्रमित होने का पता हो
  2. संक्रमित होने का पता चलने पर कम से कम 90% को इलाज मिले
  3. इलाज कराने वाले 90% मरीजों में दवाओं से वायरल लोड बेहद कम हो

चेचक : इतिहास का पहला वायरस जिसे वैक्सीन से पूरी तरह खत्म किया गया

इंसान चेचक के भयानक प्रकोप के कई दौर देख चुका है। वैरियोला वायरस से फैले इस महामारी की शुरुआत यों 1520 में मानी जाती है, मगर मिस्र में मिली ममी में भी इसके सबूत मिले हैं। किसी भी वायरस की तुलना में चेचक दुनिया के सबसे अधिक लोगों की जान (30 से 50 करोड़ मौत) ले चुका है। इससे जान जाने की दर 90% है। अकेले बीसवीं सदी में ही इस बीमारी से 20 करोड़ लोगों की मौत हुई। हालांकि वैक्सीनेशन के जरिए इस वायरस को अब दुनिया से पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। 1796 में ब्रिटेन के डॉक्टर एडवर्ड जेनर ने इसकी पहली वैक्सीन ईजाद की थी। मानवता के इतिहास में केवल चेचक ऐसी बीमारी है, जिस पर किसी दवा या वैक्सीन के जरिए पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका। 1979 में डब्लूएचओ ने पूरी दुनिया को चेचक मुक्त घोषित कर दिया था।

इन्फ्लुएंजा- इसके किसी न किसी वायरस से हर साल करीब 5 लाख लोग गंवाते हैं जान

आम खांसी-जुकाम को भी फ्लू कहते हैं और स्पेनिश फ्लू को भी। इन्फ्लूएंजा के 4 कैटेगरी के वायरस कई तरह के संक्रमण के लिए जिम्मेदार है। स्पेनिश फ्लू इंसान के हालिया इतिहास की सबसे भयंकर महामारियों में से एक है। माना जाता है कि इससे 5 करोड़ लोगों मौत हुई थी। मौजूदा कोरोना की तरह स्पेनिश फ्लू से निपटने के लिए भी लोगों को क्वारंटीन किया जाता था। 1968 में फैले हॉन्गकॉन्ग फ्लू से दस लाख लोगों की जान गई थी। आज भी वो वायरस सीजनल फ्लू के तौर पर हमारे बीच में है। इसी तरह स्वाइन फ्लू भी एच1एन1 वायरस के ही एक और रूप से फैलती है। माना जाता है कि 2009 में 70 करोड़ से 140 करोड़ लोग असिम्प्टोमेटिक (बिना लक्षणों वाले) स्वाइन फ्लू से संक्रमित हुए, जो उस समय की 6.8 अरब आबादी का करीब 11 से 21% था। मगर इंसानों ने इसे भी काबू कर लिया। डब्लूएचओ ने 2010 में इस महामारी को भी समाप्त घोषित कर दिया।

हंतावायरस: संक्रमित चूहे या गिलहरी से फैला, चीन में बनी वैक्सीन

चूहों से फैलने वाले हंता वायरस के बारे में 1993 में पहली बार पता चला था। जब अमेरिका में एक कपल इस वायरस से संक्रमित होने के कारण मर गया था। इसके बाद कुछ ही महीनों में इस बीमारी से 600 लोगों की मौत हो गई थी। हंता वायरस से संक्रमित चूहे या गिलहरी किसी इंसान को काट लें तो इससे भी संक्रमण फैल सकता है। इस वायरस के फैलने का एक प्रमुख कारण चूहों के मल-मूत्र की जगह के संपर्क में आना है। कोरियाई युद्ध के दौरान हंता वायरस की वजह से 3000 सैनिक बीमार हुए थे, इनमें से 12 फीसदी मारे गए थे।

रैबीज : हर साल 20 हजार लोगों की मौत, वैक्सीन से पक्का बचाव मुमकिन

रैबीज एक वायरल बीमारी है, इसके कारण गर्म रक्त वाले जीवों के मस्तिष्क में सूजन (एक्यूट इन्सेफेलाइटिस) होती है। 99% यह बीमारी कुत्तों के काटने या उनसे खरोंच लगने के कारण होता है। भारत में हर साल 20 हजार लोगों की जान रैबीज से जाती है, जिनमें 40% की उम्र 15 साल से कम होती है। जबकि पूरी दुनिया में यह आंकड़ा 59 हजार है। 150 से ज्यादा देशों में फैली इस बीमारी की एंटी रैबीज वैक्सीन मुफ्त लगाई जाती हैं। यह आमतौर पर कुत्तों के काटने और संक्रमित जानवरों से खरोंच लगने के कारण होता है। प्रसिद्ध फ्रेंच वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने 6 जुलाई 1885 में रैबीज के टीके का सफल परीक्षण किया। उनकी इस खोज ने मेडिकल की दुनिया में क्रांति ला दी और मानवता को एक बड़े संकट से बचा लिया था।

इबोला: 44 सालों में 16 देशों में फैला, इसकी वैक्सीन बनी

इबोला सबसे पहले 1967 में सामने आया था। 44 सालों के बाद भी इस वायरस को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है। 44 सालों में यह वायरस 16 देशों में फैल चुका है। सीरिया, लाइबेरिया और गिनी में इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आए। 31 हजार मामलों में 28 हजार से ज्यादा मामले इन तीन देशों में आए, जो कुल मामलों का 92% है। इसे डब्ल्यूएचओ ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया। इस संक्रमण से अभी तक करीब 13 हजार लोगों की जान जा चुकी है। 2013 से 2016 के बीच ही सीरिया, लाइबेरिया और गिनी के 11,300 लोगों की जान ली इस संक्रमण से गई।

मर्स : 8 सालों में 27 देशों तक पहुंचा, 5 वैक्सीन तैयार होने की कगार पर

वायरस सबसे पहले 2012 में सउदी अरेबिया में सामने आया और फिर 2015 में साउथ कोरिया। । जिस वर्ग से सार्स कोरोना वायरस और मौजूदा कोविड-19 आते हैं, उसी वर्ग से मर्स का भी संबंध था। सबसे पहले यह बीमारी ऊंटों को हुई और उससे इंसानो में फैली।। पिछले 8 साल में इसके मामले सामने आ रहे हैं। आठ साल में यह वायरस 27 देशों में फैल चुका है। अभी तक इस वायरस के 2494 मामले सामने आ चुके हैं। इसके चलते अब तक 858 लोगों की जान जा चुकी है। इस वायरस की मृत्यु दर 34% से ऊपर है।

रोटावायरस : हर साल 4 लाख बच्चों की मौत, वैक्सीन से इसे भी मारना मुमकिन

विकासशील देशों में रोटावायरस छोटे बच्चों का अपना शिकार ज्यादा बनाता है। 2008 में रोटावायरस के संक्रमण से 5 साल से ज्यादा उम्र के करीब 4.5 लाख बच्चों की मौत हो गई थी, वहीं 2013 में रोटावायरस के संक्रमण के कारण लगभग 2,15,000 मौतें हुई थी, जिसमें ज्यादातर बच्चे ही थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल इस रोग से करीब 4 लाख बच्चों की मौत हो जाती हैं। इससे संक्रमित बच्चों में डायरिया की गंभीर शिकायत पाई जाती है। पहला वैक्सीन 2006 में मैक्सिको को मिला था। बाजार में अब इसके दो वैक्सीन उपलब्ध हैं।

मारबर्ग : मरने की दर 90%, 2019 में अमेरिका ने बनाई वैक्सीन

आज से 53 साल पहले 1967 में यह वायरस सर्बिया और युगोस्लाविया में सबसे पहले सामने आया। यह वायरस जर्मनी की एक लैब से लीक हो गया था, जो कि बंदरों से इंसानों में आया था। 1967 से लेकर 2014 तक इस वायरस के मामले सामने आते रहे। 13 देशों में इस वायरस का असर देखा गया, जिसमें से अधिकतर अफ्रीकी देश हैं। अब तक इस वायरस के सिर्फ 587 मामले सामने आए हैं। सबसे ज्यादा मामले अंगोला और डीआर कांगो में सामने आए हैं। दोनों देशों को मिलाकर 528 मामले होते हैं, जो कुल मामलों का लगभग 90% है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 587 मामलों में 475 लोगों की मौत हो गई। यह दुनिया का सबसे जानलेवा वायरस है।

कोरोना : भारत में बनेगी रूसी वैक्सीन स्पूतनिक वी

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस दुनियाभर में एक खतरनाक महामारी का रूप ले चुका है। दुनिया में अब तक कोरोना के 6 करोड़ 30 लाख मामले सामने आ चुके हैं। 14 लाख 66 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। अच्छी बात ये कि अब तक 4 करोड़ 36 लाख लोग ठीक हो चुके हैं। भारत में अब तक अब तक 94.32 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं, 88.46 लाख लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 1.37 लाख मरीजों की मौत हो चुकी है। दुनिया में कोरोना की करीब 48 वैक्सीन विकसित की जा रही हैं। इनमें से करीब 9 वैक्सीन का ट्रायल तीसरे चरण में हैं। माना जा रहा है कि 2021 जून-जुलाई में इसकी भी वैक्सीन तैयार हो जाएगी।



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We won over the deadly virus from the corona that attacked humans, the goal of eradicating HIV from the world by 2030


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रविवार, 29 नवंबर 2020

दो साल में 335 धार्मिक ग्रंथों को किया डिजिटल; ऑनलाइन पढ़ने के साथ उच्चारण भी सुन सकते हैं https://ift.tt/2VdsoSk

धार्मिक पुस्तकों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर गीता प्रेस में काम कर चुके मेघ सिंह चौहान पिछले दो साल में 335 धार्मिक ग्रंथ और किताबें डिजिटल कर चुके हैं। जोधपुर के मूल निवासी मेघ सिंह चौहान 25 साल तक गीता प्रेस गोरखपुर में असिस्टेंट मैनेजर रहे। कुछ साल पहले उन्होंने गीता प्रेस की किताबों को ई-बुक में तब्दील करने की ठानी।

2017 में नौकरी छोड़ शुरू किया काम

संस्थान में नौकरी करते हुए यह संभव नहीं हुआ तो इसके लिए उन्होंने 2017 में गीता प्रेस की नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने के बाद भी उन्हें कई जगहों से लाखों रुपए महीने के पैकेज का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया। उद्देश्य एक ही था कि युवाओं के हाथ में मोबाइल है तो इस मोबाइल में युवा पीढ़ी को संस्कार लाने वाली कुछ चीजें को भी उपलब्ध करवाना चाहिए। जोधपुर लौटकर 2018 से उन्होंने गीता प्रेस की किताबों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिए काम शुरू किया।

इसके लिए गीता सेवा ट्रस्ट एप बनाने के अलावा वेबसाइट, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप पर लाने के लिए काम शुरू किया। इसके लिए लोगों की मदद से गीता सेवा ट्रस्ट बनाया और मात्र दो साल में धर्म ग्रंथों की 335 पुस्तकों को हिंदी-अंग्रेजी की ई-बुक में बदल दिया।

आज साढ़े 3 लाख लोग डिजिटल प्लेटफार्म से जुड़े हैं। अब कन्नड़, तमिल, बांग्ला सहित सहित क्षेत्रीय भाषाओं में धार्मिक पुस्तकों को डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने के लिए काम हो रहा है। 2021 में तक अधिकांश क्षेत्रीय भाषाओं में गीता प्रेस की पुस्तकें उपलब्ध होंगी, वो भी निशुल्क।

स्कैन की जगह हर शब्द को दोबारा टाइप किया गया
मेघ सिंह कहते हैं कि इन्हें पढ़ने के लिए पुस्तकों को धार्मिक ढंग से सहेजना भी होता है। हजारों पेजों की पुस्तकों को आसानी से पढ़ा जा सके, इसके लिए स्कैन करने की जगह हर शब्द को टाइप किया गया। 50 लोगों की टीम ने दिन-रात काम किया। लोगों की मदद से गीता सेवा ट्रस्ट बनाया और गीता प्रेस की अधिकांश पुस्तकें आज एक एप पर मुफ्त में ऑनलाइन उपलब्ध हैं। अन्य भाषाओं के लिए अब भी लोग घर से काम कर रहे हैं।

सबसे बड़ी खासियत, हर पुस्तक को पढ़ने के साथ हर शब्द का शुद्ध उच्चारण साथ-साथ सुनने को मिलता है। यानी अगर आप रामायण पढ़ रहे हैं तो एप पर साथ-साथ उच्चारण भी ऑडियो में चलता रहेगा। गीता ट्रस्ट गोरखपुर के ट्रस्टी ईश्वर प्रसाद पटवारी कहते हैं कि गीता प्रेस और गीता सेवा ट्रस्ट दोनों अलग ईकाई हैं। लेकिन दोनों में कोई आपत्ति या विवाद नहीं है।

चूंकि गीता प्रेस डिजिटल प्लेटफार्म पर नहीं आ सकता था तो गीता सेवा ट्रस्ट ये काम कर रहा है। लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा लोग डिजिटल प्लेटफार्म पर आए और लाभ लिया। मेघ सिंह बताते हैं कि गीता प्रेस में तकनीकी काम देखते हुए हमने रिसर्च किया कि देश में सब कुछ डिजिटल होता जा रहा है। हर युवा के हाथ में मोबाइल है लेकिन हमारी धार्मिक किताबों का डिजिटल वर्जन नहीं है।

मैंने ट्रस्ट से बात की। उन्हें समझाया कि अब हमें समय के साथ गीता प्रेस को डिजिटल करना चाहिए। इसके लिए डिजिटल प्लेटफार्म तैयार करना चाहिए। ट्रस्ट ने मुझे सलाह दी कि तुम चाहो तो व्यक्तिगत तौर पर डिजिटल प्लेटफार्म तैयार कर सकते हो। लेकिन ट्रस्ट की सलाह मानकर काम करना संभव नहीं था, क्योंकि नौकरी के दौरान इतना समय निकालना और डिजिटल प्लेटफार्म के लिए मददगार ढूंढना संभव नहीं था। मैंने फैसला लिया की नौकरी छोड़कर ये काम करुंगा। ट्रस्ट ने कहा कि हमारी तरफ से पूरा सहयोग रहा, ये अलग बात है कि ई-बुक तैयार करने में ट्रस्ट मेरी मदद नहीं कर सकता था।



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335 धार्मिक ग्रंथों को डिजिटल करने वाले मेघ सिंह।


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ओवैसी के गढ़ में पहुंचे शाह; सरकार के प्रस्ताव पर किसानों की ना और पाकिस्तानी क्रिकेटर पर रेप के आरोप https://ift.tt/3qaYrk4

नमस्कार!
किसानों ने सरकार से कहा है कि अब वे दिल्ली चलेंगे नहीं, बल्कि दिल्ली घेरेंगे। यानी दिल्ली जाने वाले हाईवे ब्लॉक करेंगे। उधर, गृह मंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में रोड शो किया। वे यहां नगर निगम चुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे थे।

बहरहाल, शुरू करते हैं न्यूज ब्रीफ...

आज इन इवेंट्स पर रहेगी नजर

  • प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी पहुंचेंगे। देव दीपावली कार्यक्रम में शामिल होंगे। वाराणसी से प्रयागराज तक बनने वाले सिक्स लेन हाईवे का लोकार्पण करेंगे।
  • पीएम मोदी कोरोना वैक्सीन बनाने वाली तीन टीमों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। इनके नाम जेन्नोवा बायोफार्मा, बायोलॉजिकल ई और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज हैं।
  • चंडीगढ़ में श्री गुरु नानक देव जी के 551 वें प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारों में एक लाख से ज्यादा लोगों की संगत लंगर खाएगी।

देश-विदेश

किसानों ने नहीं मानी सरकार की बात, कर दिए तीन ऐलान
दिल्ली-हरियाणा सीमा यानी सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन रविवार को भी जारी रहा। किसानों ने बैठक के बाद कहा कि हम बुराड़ी नहीं जाएंगे। बल्कि, अब दिल्ली जाने वाले सभी रास्ते ब्लॉक किए जाएंगे। इससे पहले, केंद्र ने कहा था- किसान बुराड़ी में इकट्ठा हों, तो सरकार उनसे बातचीत करने तैयार है। आंदोलन के मुद्दे पर रविवार रात भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बैठक की।

हैदराबाद पहुंचे शाह, ओवैसी और KCR को घेरा
गृह मंत्री अमित शाह रविवार को हैदराबाद पहुंचे। वहां नगर निगम चुनाव होने हैं। शाह ने सिकंदराबाद में रोड शो किया। उन्होंने कहा- चंद्रशेखर राव जी से पूछना चाहता हूं कि आप ओवैसी की पार्टी से समझौता करते हैं, इससे हमें कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत है कि आप एक कमरे में ईलू-ईलू करके सीटें बांट लेते हैं।

छत्तीसगढ़ में IED ब्लॉस्ट; असिस्टेंट कमांडेंट शहीद
छत्तीसगढ़ के सुकमा के चिंतागुफा क्षेत्र में शनिवार रात IED ब्लास्ट हुआ। इसमें COBRA बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट नितिन भालेराव शहीद हो गए। सेकंड इन कमांड दिनेश सिंह समेत 9 जवान घायल हैं। इनमें से 7 को रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 4 जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मोदी बोले- संसद ने कृषि सुधारों को कानूनी रूप दिया
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम मन की बात के जरिए अपनी बात किसानों तक पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा- संसद में कृषि सुधारों को अमली जामा पहनाया गया। इससे किसानों को अधिकार और अवसर मिले। मोदी ने हैरिटेज, लोकल के लिए वोकल, पक्षियों, भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर भी बात की।

भास्कर एक्सप्लेनर
देश के 9 राज्यों में धर्म परिवर्तन रोकने को कानून

देश के कानून में 'लव जिहाद' नाम का कोई शब्द है ही नहीं, फिर भी इसकी चर्चा हर तरफ हो रही। मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश तो बाकायदा अध्यादेश लेकर आ गए हैं। ये जानना जरूरी है कि हमारे देश के कितने राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून है? क्या दूसरे देशों में भी ऐसे कानून हैं?

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पॉजिटिव खबर
फूड ट्रक बिजनेस से सालाना डेढ़ करोड़ का टर्नओवर

सत्या और ज्योति यूएस में रहते थे। सत्या वहां ई-कॉमर्स सेक्टर में नौकरी कर रहे थे। ज्योति भी जॉब में थीं। कुछ सालों बाद दोनों भारत वापस आ गए। उनका इरादा खुद का फूड बिजनेस करने का था। उन्होंने बिजनेस की शुरूआत किसी बहुत बड़े होटल-रेस्टोरेंट से नहीं की, बल्कि एक फूड ट्रक से की। आज उनके तीन फूड ट्रक हैं और सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ है। वे बीस लोगों को नौकरी भी दे रहे हैं।

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विदेश में लगातार दूसरी सीरीज हारी टीम इंडिया
ऑस्ट्रेलिया ने रविवार को 3 वनडे की सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम को 51 रन से हरा दिया। ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज के पहले वनडे में इसी सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में भारतीय टीम को 66 रन से हराया था। टीम इंडिया विदेशी जमीन पर लगातार दूसरी वनडे सीरीज हारी है। पिछली बार फरवरी में न्यूजीलैंड ने अपने घर में टीम इंडिया को 3-0 से हराया था।

सुर्खियों में और क्या है...

  • गुजरात में अमरेली के मोटा मुंजियासर गांव की अमिता जेंडर चेंज करवाकर आदित्य पटेल बन गईं। अमिता जन्म से लड़की थीं, बाद में उसने जेंडर चेंज करवाने का फैसला किया।
  • सिडनी में भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट मैच के बीच भारतीय लड़के ने ऑस्ट्रेलियाई लड़की को प्रपोज किया। लड़की ने लड़के को गले लगाकर प्रपोजल मंजूर कर लिया।
  • केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि जल्द ही देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर एनवायरमेंट फ्रेंडली कुल्हड़ों (मिट्‌टी के कप) में चाय मिलेगी।
  • पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान बाबर आजम पर यौन शोषण का आरोप लगा। लड़की के मुताबिक, बाबर ने 10 साल तक उसका यौन शोषण किया। पाकिस्तानी न्यूज चैनल '24 न्यूज HD' ने यह जानकारी दी।


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दिल्ली के दरवाजे पर किसान, सरकार ने किए इंतजाम... फिर भी परेशान https://ift.tt/3fMeBvm



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अच्छाई फैलनी चाहिए और बुराई को एक ही जगह समेट देना चाहिए, तभी समाज का भला होता है https://ift.tt/3fRdE5g

कहानी- आज 30 नवंबर को सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेवजी की जयंती है। गुरु नानक हमेशा घूमते रहते थे और अपने आचरण से ही शिष्यों को और समाज को सुखी जीवन के संदेश देते थे। उनके आशीर्वाद सभी को आसानी से समझ नहीं आते थे। जो लोग उन्हें जानते थे, सिर्फ वे ही उनकी बातों को समझ पाते थे। उनके आशीर्वाद बहुत सरल होते थे, लेकिन उनका अर्थ काफी गहरा रहता था।

एक बार गुरु नानक अपने शिष्यों के साथ किसी गांव में पहुंचे। उस गांव के लोग बहुत निराले थे। गांव के लोगों को गुरु नानक के बारे में मालूम हुआ तो सभी उनके डेरे पर प्रणाम करने पहुंचे। उस समय गुरु नानक ने लोगों के एक समूह को आशीर्वाद दिया कि 'बस जाओ' यानी यहीं रहने लगो।

कुछ देर बाद एक दूसरा समूह आया तो गुरुनानक ने उन्हें कहा कि 'उजड़ जाओ' यानी बिखर जाओ।

शिष्यों ने गुरु नानक से पूछा, 'ये कैसा आशीर्वाद है? एक समूह को आप कहते हैं बस जाओ और दूसरे समूह को कहते हैं उजड़ जाओ।'

गुरु नानक बोले, 'लोगों का जो पहला समूह आया था, उसके लोग अच्छे नहीं थे। सभी बुरे कामों में लगे रहते हैं। गलत लोग एक ही जगह रुक जाएं, तो अच्छा है। कम से कम समाज में बुराई नहीं फैलेगी। इसीलिए, मैंने उन्हें यहीं बस जाने का आशीर्वाद दिया। दूसरे समूह के लोग अच्छे थे इसलिए मैंने उन्हें उजड़ जाने का आशीर्वाद दिया, ताकि वे जहां जाएंगे अच्छाई फैलाएंगे और समाज का भला करेंगे।'

सीख- गुरु नानक का संदेश ये है कि हमें अच्छाई को फैलाना चाहिए और बुराई को एक ही जगह पर समेट देना चाहिए यानी खत्म कर देना चाहिए। इसी से हमारा और समाज का कल्याण होता है।



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टूरिज्म इंडस्ट्री को 80% तक नुकसान; जिन होटलों में 40 कमरे, वहां 10 भी बुक नहीं हो रहे https://ift.tt/37m3JjZ

दार्जिलिंग की पहाड़ियों से कंचनजंगा की सफेद बर्फ को देखने के लिए लोग देश के कोने-कोने से आते हैं। यहां की खूबसूरत घाटियां, पहाड़ी झरने, घास के मैदान, पहाड़ी ढलान और दूर तक दिखते चाय के बागान पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। लेकिन कोरोना ने दार्जिलिंग की दिलकश वादियों और आंखों में बस जाने वाले नजारों से पर्यटकों को दूर कर दिया है। टी, टिंबर और टूरिज्म के लिए मशहूर दार्जिलिंग में चाय के नए बागान लग नहीं रहे हैं। टिंबर उद्योग दम तोड़ चुका है। टूरिज्म को कोरोना ने करीब-करीब खत्म ही कर दिया है।

दार्जिलिंग में हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं। जंगलों में सैलानियों को घुमाने वाले लोग घर चलाने के लिए अवैध शिकार की तरफ भी मुड़ सकते हैं। गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन के असिस्टेंट डायरेक्टर टूरिज्म सूरज शर्मा कहते हैं, 'पहले के मुकाबले अभी 15-20% पर्यटक ही आ रहे हैं। अभी दशहरे के दौरान चार दिन कुछ टूरिस्ट आए, लेकिन ज्यादातर पश्चिम बंगाल के ही थे। बाहर के पर्यटक अभी नहीं आ रहे हैं।' शर्मा कहते हैं, 'कई महीने तो सबकुछ बंद रहा। अब होटल खुले हैं लेकिन 15-20% से ज्यादा बुकिंग नहीं है। जिन होटलों में 40 कमरे हैं, वहां 10 भी बुक नहीं हो पा रहे हैं।'

कनेक्टिविटी न होने से घटा टूरिज्म

ईस्टर्न हिमालयन ट्रेवल एंड टूरिज्म नेटवर्क के महासचिव सम्राट सान्याल कहते हैं कि पर्यटकों के नहीं आने की एक बड़ी वजह कनेक्टिविटी का पूरी तरह बहाल ना हो पाना भी है। सान्याल कहते हैं, 'ट्रेन और फ्लाइट पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं हैं। जो पर्यटक अभी आ रहे हैं, वे पश्चिम बंगाल से ही हैं। 2019 के मुकाबले हमारा बिजनेस 80-90% तक डाउन है।'

दार्जिलिंग की पहाड़ियों से कंचनजंगा की सफेद बर्फ को देखने के लिए देश के कोने-कोने से लोग यहां आते हैं।

एसोसिएशन फॉर कंजर्वेशन एंड टूरिज्म के कन्वेनर और पश्चिम बंगाल और सिक्किम के पर्यटन सलाहकार राज बासू कहते हैं कि बीते साल के मुकाबले पर्यटन 80% तक कम है। बासू कहते हैं, 'उत्तर बंगाल और सिक्किम में सीधे तौर पर 10 लाख लोग पर्यटन उद्योग से जुड़े हैं। पर्यटन के सीजन के दौरान होने वाले टर्नओवर का एक फीसदी भी हम हासिल नहीं कर पाए हैं। हम नहीं जानते कि अब हम सर्वाइव कर पाएंगे या नहीं।'

सूरज शर्मा बताते हैं, 'दार्जिलिंग में ही सीधे तौर पर 8 से 10 हजार कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। बहुत लोगों की नौकरी चली गई है। जो नौकरी पर हैं, उन्हें भी तीस फीसदी तक ही सेलरी मिल रही है। जिसे पहले 10 हजार मिलते थे, उसे 3 हजार रुपए ही मिल रहे हैं।' सम्राट सान्याल कहते हैं, 'अभी तक किसी तरह 25-30% सेलरी दी जा रही है। अगर चीजें ठीक नहीं हुईं, तो 50% लोगों को पूरी तरह नौकरी से निकाला जा सकता है।'

छोटे काम-धंधे वाले सबसे ज्यादा परेशान

बासू कहते हैं, 'लोग अपने टैक्स नहीं भर पा रहे हैं। बिजली के बिल नहीं भर पा रहे हैं। यहां तक की रोजमर्रा के खर्च पूरे नहीं कर पा रहे हैं। जो स्थानीय लोग गाड़ी चलाते थे या छोटे-छोटे लॉज चलाते थे, वे सबसे ज्यादा परेशान हैं। बड़े होटल किसी तरह अपना काम चला पा रहे हैं। छोटे काम-धंधों वालों के हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग गाड़ियां और लॉज बेच रहे हैं या इस बारे में सोचने लगे हैं।'

गोरूमरा नेशनल पार्क में अधिकारियों से चर्चा करने आए राज बासू कहते हैं, 'जंगल में पर्यटन से जुड़े अधिकतर लोग सेलरी पर काम नहीं करते हैं। गाइड या जीप सफारी कराने वालों की इनकम टूरिस्ट से ही जुड़ी है। फॉरेस्ट अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों के बेरोजगार होने से जंगल पर दबाव बढ़ेगा। ऐसे लोग अवैध शिकार और जंगल की कटाई की तरफ भी रुख कर सकते हैं। कंजर्वेशन के लिहाज से ये बड़ा खतरा है, जो हमें दिखाई दे रहा है। '

अब गांवों की तरफ जा रहे हैं पर्यटक

पहले के मुकाबले 15-20% पर्यटक ही आ रहे हैं। ज्यादातर होटलों में कमरे खाली पड़े हैं।

सूरज शर्मा कहते हैं, 'पर्यटक अभी शहर छोड़कर गांवों की ओर जा रहे हैं। विलेज टूरिज्म बढ़ रहा है। लोग होम स्टे में रहना पसंद कर रहे हैं। टूरिस्ट ऐसी जगह जाना चाह रहे हैं, जहां भीड़-भाड़ ना हो। गांवों में अभी पर्यटक हैं, लेकिन शहरों में बड़े होटलों से टूरिस्ट गायब हैं।'

सम्राट सान्याल कहते हैं, 'पिछले एक महीने में नया ट्रेंड देखने को मिला है। पर्यटक ऑफबीट डेस्टिनेशन ज्यादा पसंद कर रहे हैं। होम स्टे में 90% तक कमरे बुक हुए हैं। लेकिन, पॉपुलर डेस्टिनेशन से पर्यटक अभी दूर ही हैं।' राज बासू कहते हैं, 'भारत में सबसे ज्यादा होम स्टे उत्तर बंगाल के पहाड़ी इलाकों में ही हैं। कैलिमपोंग के रूरल एरिया में होम स्टे की तादाद बहुत ज्यादा है। दशहरा दीवाली के दौरान होम स्टे 70% तक बुक थे।'

टूरिज्म इंडस्ट्री को वैक्सीन से उम्मीद

सूरज शर्मा कहते हैं कि पर्यटन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि अगर वैक्सीन जल्द आ गई तो कारोबार पटरी पर लौट सकता है। सम्राट सान्याल भी कहते हैं कि जब तक लोगों का डर नहीं निकलेगा, तब तक लोग बाहर नहीं निकलेंगे। वे कहते हैं, 'जहां प्रोटोकॉल फॉलो किए जा रहे हैं, वहां केस कम हैं। वैक्सीन आएगी तो लोगों का डर खत्म हो जाएगा।'

इधर, राज बासू का मानना है कि वैक्सीन आने के बाद भी पर्यटन को पटरी पर लौटने में समय लगेगा। बासू कहते हैं, 'वैक्सीन के भी बाजार में जाने के बाद पर्यटन उद्योग को पटरी पर आने में साल डेढ़ साल लग ही जाएगा। हमें लगता है कि अप्रैल 2022 से पहले हम पूरी तरह रिवाइव नहीं कर पाएंगे।'

बासू कहते हैं, 'हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है पर्यटन उद्योग को जिंदा रखना। इस काम से छोटे-छोटे लोग जुड़े होते हैं, जैसे ड्राइवर, चाय बेचने वाले, मोमोज बेचने वाले या छोटे-छोटे सामान बेचने वाले। ऐसे चालीस फीसदी लोग अब धंधे से दूर हो चुके हैं। जो बाकी 60% बचे हैं, उन्हें बेहतरी की उम्मीद है। हमें डर है कि मार्च तक पर्यटन से जुड़े 60% लोग यह कारोबार छोड़ देंगे।

टी, टिंबर और टूरिज्म के लिए मशहूर दार्जिलिंग में चाय के नए बागान लग नहीं रहे, टिंबर उद्योग भी दम तोड़ चुका है।

पर्यटन पश्चिम बंगाल का सबसे तेजी से बढ़ता उद्योग था। दार्जिलिंग में चाय के बागानों की चमक फीकी पड़ने के बाद लोग बड़ी तादाद में पर्यटन से जुड़े थे। ये होमग्रोन इंडस्ट्री है, जो लोगों ने अपने दम पर खड़ी की है। यहां पर्यटन उद्योग गांव-गांव तक पहुंच गया है। इसकी आमदनी से लोगों का जीवन स्तर सुधरा है। बासू कहते हैं, 'टूरिज्म से जुड़े लोग अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे थे। दार्जलिंग और कैलिंपोंग के आसपास गांव-गांव में लोग इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं।'

सरकार से कोई मदद नहीं मिली

राज बासू बताते हैं कि अभी तक राज्य या केंद्र सरकार ने पर्यटन उद्योग को राहत देने के लिए कुछ भी नहीं किया है। वे कहते हैं, 'हमें नहीं पता कि आगे क्या होगा। राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने अभी तक हमें कोई भरोसा नहीं दिया है। हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया गया है। हम सरकार से पैसों की मदद की उम्मीद नहीं करते, लेकिन कम से कम नैतिक तौर पर तो हमारा समर्थन किया ही जा सकता है। अगले दो साल तक हमसे टैक्स न लिए जाएं, ये ही हमारी बड़ी मदद होगी।'

सम्राट सान्याल कहते हैं कि सरकार और कंपनियां कर्मचारियों को लीव एंड ट्रैवल अलाउंस कैश देने के बजाए उन्हें यात्रा करने को प्रोत्साहित करें। टूरिज्म इंडस्ट्री को जिंदा रखने के लिए यात्राओं को बढ़ावा देना जरूरी है।



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80% loss to tourism as compared to last year, ten hotels are not able to book in hotels which have 40 rooms.


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